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लोकसभा चुनावों में भी जारी रहेगा भाजपा विरोधी रूझान : वाघेला

11th December 2018   ·   0 Comments

कहा- 2019 का ट्रेलर, -भाजपा विरोधी पार्टियां 320 सीटें जीतकर यूपीए-3 बनाएगी

अहमदाबाद. गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत-बढ़त को
भाजपा के चेहरे पर एक बड़ा तमाचा बताया है। कांंग्रेस के पूर्व नेता ने इस परिणाम को 2019 के
लोकसभा चुनाव का ट्रेलर करार दिया। भाजपा विरोधी यह रूझान लोकसभा चुनावों में भी जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ के मतदाताओं ने भाजपा के अहंकार को तोड़ते
हुए विपक्षी कांग्रेस के पक्ष में वोट किया है। भाजपा को इस बात का घमंड था कि पार्टी मनी पावर का
उपयोग कर चुनाव जीत सकती है। यह हार मतदाताओं की ओर से भाजपा के चेहरे पर तमाचा है,
जिन्होंने लोकतंत्र की आत्मा को जिंदा रखा है।
मोदी ने पूरा समय प्रचार में लगाया :
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने चार वर्ष से ज्यादा का
समय देश को ठीक ढंग से चलाने के बजाय सिर्फ अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान में लगाया।
मोदी सोचते हैं कि लोग भाजपा को उनके मुख्यमंत्रियों की बजाय सिर्फ उनके लिए वोट देंगे, लेकिन
इस बार मतदाओं ने उन्हें नकार दिया।
कांग्रेस के प्रदर्शन पर खुशी जताते हुए वाघेला ने यह विश्वास जताया कि अगले वर्ष के आम चुनाव
के बाद महागठबंधन सत्ता पर काबिज होगा। भाजपा विरोधी पार्टियां 320 लोकसभा सीटें जीतकर
सरकार बनाएगी। यूपीए-3 एक वास्तविकता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि 20-25 पार्टियों वाली
सरकार केन्द्र की वर्तमान भाजपा सरकार से बेहतर काम करेगी।
झूठे वादों को नकारा :
उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने भाजपा के झूठे वादों को नकार दिया। वाघेला ने बताया कि नोटबंदी,
जीएसटी, किसानों का असंतोष, बेरोजगारी तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति इन राज्यों में भाजपा के हार
का कारण बनी।
उहोंने राहुल गांधी को बिना किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा वाला निर्दोष व्यक्ति बताया। वाघेला ने
बताया कि राहुल सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। साथ ही उन्होंने खुद को अगले
प्रधानमंत्री की रेस में होने की घोषणा भी नहीं की।
[10:28 PM, 12/11/2018] Vikas Sharma: नोटबंदी का खाका खींचने वाले दास आरबीआइ प्रमुख

नई जिम्मेदारी: उर्जित के इस्तीफे के अगले दिन ही जेटली के खास रहे शक्तिकांत को केंद्रीय बैंक की कमान

नई दिल्ली. उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) को उसका नया गवर्नर मिल गया है। 15वें वित्त आयोग के सदस्य शक्तिकांत दास को आरबीआइ का नया प्रमुख बनाया गया है। ब्याज दरों में कटौती समेत कई मुद्दों पर सरकार से चले आ रहे टकराव के बाद उर्जित ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया था।
8 नवंबर, 2016 में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी का फैसले लेने
में शक्तिकांत दास की अहम भूमिका थी। सरकार की तरफ से लिए गए इस फैसले का मसौदा बनाने वालों में शक्तिकांत दास भी शामिल थे।
शक्तिकांत दास का कार्यकाल तीन साल का होगा। दास मई, 2017 तक वित्त मामलों के सचिव रहे थे।
दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से मास्टर्स डिग्री लेने वाले शक्तिकांत दास ने करीब 38 साल के कॅरियर में वित्त मंत्रालय और व्यय विभाग के संयुक्त सचिव, तमिलनाड़ु सरकार के विशेष आयुक्त और राजस्व आयुक्त, उद्योग विभाग के सचिव के साथ-साथ कई अहम पदों पर काम किया है। 26 फरवरी 1957 को ओडिशा में जन्मे दास ने 2008 से केंद्र सरकार के लिए काम किया। दास को वित्त मंत्री अरुण जेटली का खास बताया जाता है। जेटली ने कई बार सार्वजनिक तौर पर दास के प्रशासनिक कार्यकौशल की तारीफ भी की।

जी-२० में निभाई थी अहम भूमिका
तमिलनाडु कैडर के 1980 बैच के आइएएस दास ने जी-20 में भारत की ओर से अहम भूमिका निभाई थी। नोटबंदी के आदेश के बाद छोटे-बड़े ऐलान को लेकर दास मीडिया से मुखातिब होते रहे थे।

एक रुपए के नोट पर दास के दस्तखत
मई 2017 में सरकार ने एक रुपए का नया नोट छापने का ऐलान किया था। यह नोट भारत सरकार की तरफ से जारी होना था और इस पर तब वित्त सचिव रहे शक्तिकांत दास के हस्ताक्षर हुए।

इधर, अर्थशास्त्री भल्ला का इस्तीफा
नई दिल्ली. जाने माने अर्थशास्त्री और स्तंभकार सुरजीत भल्ला ने मंगलवार को प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने ट्वीट कर बताया यह इस्तीफा उन्होंने एक दिसंबर को ही दे दिया था। वह परिषद में अल्पकालिक सदस्य थे। भल्ला ने अपने इस्तीफे की वजह नहीं बताई है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबोरॉय करते हैं। इनके अलावा इसमें रथिन रॉय, रतन वाटल, आशिमा गोयल और शमिका रावी अन्य अल्पकालिक सदस्य हैं। भल्ला के इस्तीफे की खबर ऐसे समय में सामने आई है जब एक दिन पहले ही आरबीआइ के गवर्नर उर्जित पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। भले ही पटेल ने अपने इस्तीफे के पीछे निजी कारणों का हवाला दिया हो, लेकिन उनका आरबीआइ की स्वायत्ता और उसकी कमाई में सरकार को ज्यादा अंश दिए जाने समेत अन्य अहम मुद्दों पर टकराव चल रहा था।
[10:31 PM, 12/11/2018] Vikas Sharma: मौत के बाद भी उजागर न हो रेप पीडि़ता की पहचान: सुप्रीम कोर्ट

दिशा-निर्देश: देश के हर जिले में बने वन स्टॉप सेंटर, जहां मिल सके समाधान

पीडि़ताओं के साथ अछूतों जैसे बर्ताव की मानसिकता बदलें

पत्रिका ब्यूरो
श्चड्डह्लह्म्द्बद्मड्ड.ष्शद्व
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार पीडि़ताओं की पहचान उजागर करने और उनके साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव पर सख्त टिप्पणी की है।
जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने बलात्कार पीडि़ताओं के नाम और तस्वीर सार्वजनिक करने पर सख्त आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि जांच एजेंसी, पुलिस या मीडिया के द्वारा किसी भी सूरत में रेप पीडि़ताओं की पहचान उजागर नहीं की जानी चाहिए। यहां तक कि मौत के बाद या सुध-बुध गंवा चुकी पीडि़ताओं की पहचान भी उजागर न हो।
पीठ ने कहा, यह बेहद दुखद है कि समाज में बलात्कार पीडि़ताओं के साथ अछूतों जैसा बर्ताव किया जाता है। आरोपियों के बजाय उन्हें सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। इस मानसिकता में बदलाव होना ही चाहिए।
पीठ ने केंद्र सरकार और राज्य व संघशासित प्रदेशों की सरकारों को भी प्रत्येक जिले में एक वन स्टॉप सेंटर(एक ही जगह सभी सुविधा देने वाले केंद्र) बनाने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, इस सेंटर पर बलात्कार से संबंधित सभी मुद्दों का समाधान होना चाहिए और बलात्कार पीडि़ताओं के कल्याण और पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए। वकील निपुण सक्सेना की इस जनहित याचिका पर इस मामले में पिछले दिनों सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत से कहा गया था कि महिलाओं के प्रति अपराध के मामलों में निष्पक्ष सुनवाई के लिये प्रेस की आजादी और पीडि़ता के अधिकार के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है।

मीडिया ट्रायल पर लगे रोक: जयसिंह
इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रही वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कोर्ट में दलील थी कि अदालत के विचाराधीन मामलों में मीडिया ‘समांतर सुनवाई’ कर रहा होता है और इसलिए शीर्ष अदालत को महिलाओं के प्रति अपराध के मामलों की रिपोर्टिंग के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करना चाहिए। जयसिंह का यह भी दावा था कि सक्षम अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने से पहले ही पुलिस मीडिया को सूचनाएं लीक करती है जो न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप के समान है। उन्होंने कठुआ सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले का जिक्र करते हुए दावा किया था कि इसमें अदालत में आरोपपत्र दाखिल होने से पहले ही मीडिया ने कुछ आरोपियों के निर्दोष होने का फैसला भी सुना दिया था।

…तो एफआइआर भी अपलोड न करें
जस्टिस मदन बी लोकुर ने पुलिस को निर्देश जारी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में एफआइआर, जिसमें पोक्सो मामलों के तहत पीडि़त नाबालिग हो उसे कतई अपलोड न किया जाए। पीठ ने सख्त लहजे में कहा, पीडि़त की पहचान धुंधला दिखाकर भी एफआइआर अपलोड नहीं किया जाना चाहिए।

सिर्फ 10 फीसदी बलात्कार पीडि़त को ही मुआवजा
नालसा ने कोर्ट को बताया २०१७ में रेप या अन्य यौन हमलों में महज 10त्न को ही निर्भया या अन्य योजनाओं के तहत मुआवजा मिल पाता है।

आंध्र प्रदेश – मामले दर्ज, मुआवजा सिर्फ एक को ही मिला
राजस्थान – एफआइआर, मुआवजा सिर्फ 140 को ही मिला
[10:34 PM, 12/11/2018] Vikas Sharma: सियासी तेवर : एनडीए में २०१९ को लेकर बढ़ सकती सीटों की खींचतान

हार के साथ ही अब भाजपा को आंख दिखाने लगे सहयोगी दल

नई दिल्ली. पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के साथ ही एनडीए के साथी दलों ने भाजपा को आंख दिखाना शुरू कर दिया है, जबकि विपक्ष के अंदर कांग्रेस की हैसियत बढ़ गई है।
साफ है कि इन नतीजों के बाद सहयोगी दल महंगाई, कृषि और आर्थिक संकट को लेकर मोदी सरकार को घेरने में गुरेज नहीं करेंगे। मंगलवार को शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि नतीजे साफ दिखाते हैं कि भाजपा की जीत का रथ रुक गया है। अब हमें आत्म मंथन करने का वक्त आ गया है। पार्टी २०१९ में अकेले चुनाव लड़ेगी।
पंजाब में भी अकाली दल के साथ अंदरखाने खींचतान चल रही है। लोकसभा के लिए भाजपा 10:3 के अनुपात में सीट बंटवारा चाहती है। मगर अकाली दल 6 सीटें देने के लिए राजी है। आंध्र प्रदेश में टीडीपी से नाता तोडऩे के बाद भाजपा वाईएसआर कांग्रेस के साथ बैकडोर बात चला रही है। तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक का साथ लेने के फिराक में है। उत्तर प्रदेश में भाजपा अपना दल को विलय कराने की कोशिश में है। वहीं सुहेल देव की भासपा से भी रिश्ते लगातार खराब चल रहे हैं।
[10:41 PM, 12/11/2018] Vikas Sharma: मध्यप्रदेश में कांग्रेस-भाजपा के बीच रोमांचक मुकाबला

जनता का फैसला…कई दिग्गज हारे, कमलनाथ-सिंधिया का जादू चला

प्रदेश में ट्वेंटी-२० क्रिकेट के आखिरी गेंद तक चलने वाले मुकाबले जैसे चुनाव नतीजों ने रोमांचित कर दिया। शाम तक स्थिति साफ नहीं हो सकी थी कि सत्ता किसे मिलेगी। भाजपा के लिए हालांकि ऐसी स्थिति बड़ा झटका रही।
२३० सदस्यीय विधानसभा में ११६ का जादुई आंकड़ा शाम तक पूरे प्रदेश में सनसनी बना रहा। सारे एग्जिट पोल को दरकिनार कर जनता ने ऐसा फैसला दिया कि शाम तक कोई भी ठीक से कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं था। रुझानों में कांग्रेस को ११४ सीटें मिलती दिखी वहीं भाजपा १०९ का आंकड़ा छूती नजर आई। कई दिग्गजों की हार भी चर्चा का विषय बनी रही।
तय नहीं हुआ: जश्न कौन मनाएगा
जीत का जश्न कौन मनाएगा, इसका फैसला शाम तक नहीं हो पाया। दोनों ही दलों के खेमों में कभी खुशी-कभी गम जैसा माहौल बना रहा। कई दिग्गज भाजपा नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है, वहीं कांग्रेस को भी अजय सिंह जैसे नेता का हारना बड़ा झटका दे गया।

मंत्रियों ने गंवाई नहीं सीटें, युवाओं का दबदबा
ग्वालियर चंबल अंचल में इस बार कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का जादू चला। अंचल की 34 सीटों में से 26 पर कांगे्रस, 7 पर भाजपा और 1 पर बसपा को बढ़त है। 2013 में इस अंचल में भाजपा 20, कांग्रेस 12 और बसपा दो सीटों पर काबिज थी। भाजपा को 13 सीटों का नुकसान हुआ है। दिग्गज मंत्री जयभान सिंह पवैया, रुस्तम सिंह, लालसिंह आर्य चुनाव हार गए हैं।

बुंदेलखंड की 26 में से 16 सीटों पर भाजपा जीत रही है, 2013 की तुलना में उसे 4 सीटों का नुकसान हो रहा है। वहीं कांग्रेस को 8 सीटे मिल रही है, जो पिछले चुनाव की तुलना में 2 ज्यादा है। अन्य को 2 सीटे मिली है। यहां मलहरा सीट पर मंत्री ललिता यादव, दमोह से मंत्री जयंत मलैया चुनाव हार गए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकेश नायक भी पराजित हुए हैं।

महाकौशल क्षेत्र की ३८में से २४ सीटों पर कांग्रेस और २ सीटे भाजपा जीत रही है यहां दोनों ही दलों के प्रदेश अध्यक्षों की प्रतिष्ठा दावं पर थी। कांगे्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का पलड़ा भारी है। कांग्रेस को 38 में से 24 सीटें मिल रही हैं। 2013 में उसे 13 सीटें मिली थीं। भाजपा को यहां 12 सीटों से संतोष करना पड़ रहा है,। 2013 में उसे 24 सीटें मिली थीं। गोंगपा और निर्दलीय को भी यहां एक-एक सीट मिल रही है। शिवराज सरकार के मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे चुनाव हारे हैं।

विंध्य में ३० सीटों में से ७ पर कांग्रेस व २३ पर भाजपा जीत रही है। विंध्य एक मात्र ऐसा अंचल रहा है, जहां के परिणाम पूरे प्रदेश के परिणामों से ठीक उलट आए हैं। यहां की 30 में से 24 सीटों पर भाजपा जीत रही है। पिछले चुनाव से उसे 13 सीटों की बढ़त मिली है। कांगे्रस 6 सीटों पर जीत रही है, यहां उसे 5 सीटों का नुकसान हुआ है। बसपा अपनी दोनों सीटेंं खोती नजर आ रही है। विंध्य में नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह का हारना चौकाने वाला परिणाम है।

मध्य प्रांत में ३६ में से १३ सीटों पर कांग्रेस व २३ पर भाजपा जीत रही है। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले मध्यक्षेत्र में पार्टी की बढ़त तो बरकरार है, लेकिन पिछले चुनाव की तुलना मेंं उसे 6 सीटों का नुकसान नजर आ रहा है। यहां भाजपा को 36 में से 23 सीटें मिली है। उधर कांग्रेस की सीटें छह से बढ़ कर 13 हो रही हैं। भारतीय जनतपा पार्टी का वर्षों का साथ छोड़ कांग्रेस में पहुंचे पूर्व मंत्री सरताज सिंह, भोजपुर से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, भोपाल दक्षिण-पश्चिम सीट पर मंत्री उमाशंकर गुप्ता और मंत्रीपुत्र मुदित शेजवार सांची से चुनाव हार गए ह…
[10:46 PM, 12/11/2018] Vikas Sharma: जनादेश: बदल गया राजस्थान का सियासी रंग
सिर्फ कांग्रेस नहीं जीती, जनता ने भाजपा को हराया
कांग्रेस के आठ बागी जीते, अब उनसे संपर्क शुरू

जयपुर. विधानसभा चुनाव में भाजपा को मुकाबले में रखने और कांग्रेस का अंक गणित बिगाडऩे में दस जिलों का खासा रोल रहा है। इनमें तीन जिले ऐसे हैं, जहां कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका है। इन दस जिलों में कुल 55 सीटें आती है, जिनमें से भाजपा ने 39 सीटों पर कब्जा जमाया है। जबकि कांग्रेस को सिर्फ 13 सीट मिल सकी है। वहीं अन्य के खाते में 3 सीटें गई है।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह निर्वाचन जिले में भाजपा ने पिछले चुनाव की तरह इस बार भी सभी सीटों पर जीत हासिल कर कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया है। इसके अलावा पाली और सिरोही में कांग्रेस को फायदा नहीं हुआ। वहीं जालोर, भीलवाड़ा, उदयपुर, चित्तौडग़ढ़ में भगवा लहर दिखाई दी है। पाली और सिरोही में कांग्रेस को एक सीट भी नहीं मिली है। पाली में जहां 5 सीटें भाजपा ने तो एक निर्दलीय, वहीं सिरोही में भाजपा को 2 और एक निर्दलीय को जीत मिली है।

दस जिले जिनसे मिली भाजपा को ऑक्सीजन, कांग्रेस का बिगड़ा गणित
जिले भाजपा कांग्रेस अन्य
झालावाड़ 4 0 —
पाली 5 0 1
सिरोही 2 0 1
भीलवाड़ा 5 2 —
अजमेर 5 2 1
बूंदी 2 1 —
चित्तौडगढ़़ ३ २ —
जालोर 4 1 —
उदयपुर 6 2
कोटा 3 3 —
५५ में से 39 सीटों पर भाजपा ने जमाया कब्जा, कांग्रेस को मिली सिर्फ 13 सीट

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