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 मध्यप्रदेश / 230 सीटों पर मतगणना: रुझानों में भाजपा-कांग्रेस 100 के पार लेकिन दोनों बहुमत से दूर

11th December 2018   ·   0 Comments

भोपाल. मध्यप्रदेश में 230 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। भाजपा-कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर है। कांग्रेस 111 और भाजपा 111 सीटों पर आगे चल रही हैं। भाजपा को ग्वालियर-चंबल और मालवा निमाड़ में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। दोनों अंचलों में भाजपा ने 40 सीटें गंवाईं। इनमें से 38 कांग्रेस के पास गई हैं। यहां सवर्ण और किसान आंदोलन के अलावा एंटी इन्कम्बेंसी फैक्टर का भी असर रहा। राज्य में पिछले 13 साल से शिवराज सिंह चौहान सत्ता में हैं। उन्होंने दावा किया था कि वे सबसे बड़े सर्वेयर हैं और वे जानते हैं कि भाजपा ही जीतेगी। लेकिन, राज्य के 8 एग्जिट पोल्स में से 5 सर्वे में कांग्रेस को आगे दिखाया गया था।

मध्यप्रदेश के परिणाम

विधानसभा चुनाव भाजपा को सीटें कांग्रेस को सीटें
2018 111 (नतीजे/रुझान) 111 (नतीजे/रुझान)
2013 165 58

कांग्रेस ने भाजपा से ग्वालियर-चंबल रीजन की 13 सीटें छीनीं

ग्वालियर-चंबल (34 सीटें) 2013 में सीटें 2018 में सीटें फायदा/नुकसान
भाजपा 20 07 -13
कांग्रेस 12 25 +13
अन्य 02 02 00

भाजपा ने मालवा-निमाड़ में 27 सीटें गंवाईं

मालवा-निमाड़ (66 सीटें) 2013 में सीटें 2018 में सीटें फायदा/नुकसान
भाजपा 56 29 – 27
कांग्रेस 09 34 +25
अन्य 01 03 +02

रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी

राज्य में इस बार 75त्न मतदान हुआ था। 61 साल में यह रिकॉर्ड वोटिंग पर्सेंट था। 2013 के चुनाव परिणाम से (72.18त्न) से 2.82 फीसदी ज्यादा रहा। मध्यप्रदेश के 11 जिले ऐसे थे, जहां पिछली बार के मुकाबले तीन फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई। इन 11 जिलों में कुल 47 सीटें हैं। इनमें से भाजपा के पास पिछली बार 37 और कांग्रेस के पास 9 सीटें थीं।

मालवा-निमाड़ पर नजर थी

ज्यादा वोटिंग वाले 11 जिलों में से 6 जिले मालवा-निमाड़ के थे। इनमें इंदौर, रतलाम, धार, झाबुआ, आलीराजपुर और नीमच शामिल हैं। इन जिलों में 29 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 25 सीटों पर पिछली बार भाजपा जीती थी और कांग्रेस के पास महज 3 सीटें थीं। राज्य में 2016 में किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर भी मालवा-निमाड़ में ही था। इसके बावजूद मंदसौर-नीमच-मनासा में भाजपा ने जीत दर्ज की।

शिवराज मप्र में सबसे लंबे समय तक सीएम रहने वाले नेता

मप्र में भाजपा ने 2003, 2008 और 2013 का चुनाव जीता। शिवराज सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले राज्य के इकलौते और देशभर में भाजपा के दूसरे नेता हैं। मप्र में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह 10 साल सीएम रहे। भाजपा के मुख्यमंत्रियों के लिहाज से देश में सिर्फ छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह उनसे आगे हैं। भाजपा राज्य में लगातार 15 साल सरकार चलने वाली पहली पार्टी है। 1956 में अलग राज्य बनने के 11 साल बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली। लेकिन सिर्फ चार महीने बाद ही पार्टी में टूट के कारण उसे दो साल तक सत्ता से बाहर रहना पड़ा था।

भाजपा युग : अब तक तीन मुख्यमंत्री बदले गए
2003 में उमा भारती के नेतृत्व में लड़े गए चुनाव में भाजपा ने 10 साल से मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को सत्ता से बेदखल कर दिया। भाजपा के 15 साल में उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह सीएम रहे।

कांग्रेस युग : पार्टी ने 10 मुख्यमंत्री दिए

कांग्रेस ने 32 साल के शासन में 10 मुख्यमंत्री दिए, जिन्होंने 19 बार पद संभाला। कांग्रेस के सिर्फ दो मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू और दिग्विजय सिंह टर्म पूरा कर सके। दिग्विजय ने दो कार्यकाल पूरे किए।

3 मुद्दों की वजह से चर्चा में रहा चुनाव

व्यापमं घोटाला :…
[9:14 PM, 12/11/2018] Vikas Sharma: मिजोरमः सत्ता विरोधी लहर के चलते एमएनएफ ने कांग्रेस को हराया

मिजोरमः
सत्ता विरोधी लहर के चलते एमएनएफ ने कांग्रेस को हराया

भाजपा अपने चलते नहीं,कांग्रेस के अंदरुनी झगड़े से खोल पाई खाता

मुख्यमंत्री ललथनहवला दो सीटों से चुनाव हारे

जोरामथांग होंगे अगले मुख्यमंत्री

गुवाहाटी . दस साल की कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंक मिजो नेशनल
फ्रंट (एमएनएफ) मिजोरम में नई सरकार बनाएगी।उसे पूर्ण बहुमत मिला है।कांग्रेस की
बुरी हालत है।उसे सिर्फ पांच सीटों पर संतोष करना पड़ा है।एमएनएफ को 26,भाजपा
को एक और निर्दलीय व अन्य को आठ सीटें मिली है।मुख्यमंत्री ललथनहवला ने दो
सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों सीटों सरचीप और दक्षिण चंपाई से चुनाव हार
गए।इससे पता चलता है कि सत्ता विरोधी लहर अधिक थी।वर्ष 2008 में भी सत्ता
विरोधी लहर के चलते एमएनएफ के अध्यक्ष जोरामाथांगा को भी दो सीटों से चुनाव
हारना पड़ा था।इस बार के चुनाव में भाजपा को एक सीट मिली है।उसने मिजोरम में
पहली बार खाता खोला है।पर इसमें भाजपा के बजाए कांग्रेस की अंदरुनी कलह ज्यादा
काम कर गई।कांग्रेस के वरिष्ठ मंत्री डा.बी डी चकमा को टिकट नहीं मिला तो
उन्होंने भाजपा का दामन थामा।भाजपा ने डा.चकमा को टिकट दिया और वे अपनी
विधानसभा सीट टिवचांग से चुनाव जीत गए।वैसे एमएनएफ भाजपा के नेतृत्ववाली नार्थ
ईस्ट डेमोक्रेटिक एलांयस(नेडा)में शामिल है।लेकिन अब नेडा के प्रति क्या रुख
होगा यह एमएनएफ की बैठक में तय होगा। जीतने के बाद उन्होंने कहा कि वे
फिलहाल नेडा यानि राजग में हैं।उन्होंने कहा कि पहला काम राज्य में शराबबंदी
लागू करने का होगा।एमएनएफ के अध्यक्ष होने के नाते जोरामथांग ही राज्य के अगले
मुख्यमंत्री होंगे।मिजोरम के राजनीतिक टीकाकार प्रोफेसर जे डोंगल ने कहा कि
भाजपा को एक सीट मिलना उसकी सफलता नहीं बल्कि डा.चकमा की अपनी सफलता है।वहीं
भाजपा का पूर्वोत्तर को कांग्रेस मुक्त करने का सपना मिजोरम में एमएनएफ की जीत
से पूरा हो गया है।नेडा के समन्वयक डा.हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि पिछले तीन
साल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने इसके लिए कार्य
किया।कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिजोरम
में एक-एक चुनावी सभा को संबोधित किया था,पर दोनों अपनी पार्टी को बेहतर
प्रदर्शन कराने में सफल नहीं हो सके।एमएनएफ के सलाहकार लालस्वामजुआला ने कहा
कि कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर थी।शराब से राज्य का हाल बेहाल
है।सड़कें खस्ताहाल है।इन सब वजहों से लोगों ने कांग्रेस का सफाया कर दिया।दस
साल बाद एमएनएफ की सत्ता में वापसी हुई है।

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