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Rajasthan Election 2018: ये कैसा संयोग? फिर नहीं होगा 200 विधायकों का आंकड़ा पूरा!

29th November 2018   ·   0 Comments

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में मतदान पूर्व एक प्रत्याशी की मृत्यु हो जाने से अब कुल 200 की जगह 199 विधानसभा सीटों पर ही चुनाव होंगें। जनाधार के नतीजे आने के बाद 199 जनप्रतिनिधि ही बतौर विधायक विधानसभा भवन में दाखिला लेंगें। वैसे ये पहली बार नहीं है जब राजस्थान विधानसभा 199 के फेर में फंसी नज़र आ रही है। इससे पहले भी कई मौके ऐसे आये जब किसी विधायक की मृत्यु हो जाने से राज्य विधानसभा में विधायकों की संख्या 199 पर ही ठहर गई। अब एक बार फिर से इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने से सभी की चर्चा नए विधानसभा भवन को लेकर शुरू हो गई हैं। चर्चाएं इसलिए भी हो रही हैं क्योंकि माना जाता है कि जब से विधानसभा भवन को नई शिफ्ट किया गया तब से यहां सदन में 200 सदस्यों की संख्या ज्यादा वक्त नहीं टिकती। या तो किसी की मृत्यु हो जाती है, या फिर कोई इस्तीफा दे देता है, या फिर कोई जेल चला जाता है।

रामगढ़ सीट पर अब बाद में होंगें चुनाव <br />अलवर जिले के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह चौधरी का दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। चौधरी 62 वर्ष के थे। रामगढ़ से बसपा प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह चौधरी मूल रूप से अलवर के लक्ष्मणगढ़ तहसील के सूरजगढ़ गांव के निवासी थे। रामगढ़ से लगातार दो चुनाव हारने के बाद फजरू खां का टिकट काटकर बसपा ने इस बार लक्ष्मण सिंह चौधरी को अपना प्रत्याशी बनाया था। रामगढ़ विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से सुखवंत सिंह और कांग्रेस से साफिया खान सहित 20 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

बसपा प्रत्याशी के निधन के बाद अब रामगढ़ विधानसभा सीट पर चुनाव स्थगित हो जायेंगें। लिहाज़ा 7 दिसंबर को रामगढ़ को छोड़ 199 सीटों पर ही मतदान होंगें और इतनी ही सीटों पर परिणाम आयेंगें। चुनाव आयोग से अनुमति मिलने के बाद ही रामगढ़ में नए बसपा प्रत्याशी का जाएगा, फिर मतदान होंगें।

नई विधानसभा में ‘भूत’ होने का गरमाया था मामला

पुरानी विधानसभा को जयपुर में ही नए भवन में शिफ्ट किये जाने के बाद जनप्रतिनिधियों की मौत का मामला पहले भी कई बार गरमा चुका है। कुछ समय पहले भी दो विधायकों की मौत से मौजूदा विधायकों में विधानसभा में भूत होने या अपशगुन की शंका घर कर गई थी।

दरअसल, कुछ समय पहले मांडलगढ़ से विधायक कीर्ति कुमारी और फिर नाथद्धारा से विधायक कल्याण सिंह के असामायिक निधन से विधायकों की यह शंका जबान तक आ गई थी। नागौर से आने वाले बीजेपी विधायक हबीबुर्रहमान ने तो सदन के सदस्यों की इस असामायिक मौत के लिए विधानसभा भवन स्थल को ही अपशगुनी करार दे दिया है।

इसके बाद कुछ विधायकों ने भी मुख्यमंत्री से कहा कि जब से विधानसभा बनी है, तब से दो सौ विधायक एक साथ कभी पूरे पांच साल नहीं कर पाए हैं। इस तरफ ध्यान देना होगा। उस समय हबीबुर्रहमान ने सीएम को बताया था कि जिस जगह विधानसभा भवन है वहां पहले श्मशाम और क्रबिस्तान हुआ करता था। इसके अलावा विधायक भवानी सिंह राजावत ने भी सीएम से इस स्थान की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान कराये जाने की मांग की थी।

हबीबुर्रहमान ने तब बताया था कि विधानसभा निर्माण के समय भी वे विधायक थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. भैरो सिंह शेखावत को भी इस मामले में आगाह किया था। इस आपत्ति के उठाये जाने के बाद सरकारी मुख्य सचेतक कालू लाल गुर्जर ने भी इस स्थान की सिद्धि के लिए धार्मिक अनुष्ठान करवाया जाने की ज़रुरत जताई थी।

तीन दिन तक चले थे धार्मिक अनुष्ठान

विधानसभा में काम करने वाले पुराने कर्मचारियों की माने तो जब इस विधानसभा का काम शुरू हुआ था, उस समय दो-तीन दिन तक लगातार धार्मिक अनुष्ठान चले थे। हां यह जरूर है कि जब विधानसभा में विधायकों का प्रवेश हुआ था, उस समय किसी प्रकार का कोई अनुष्ठान नहीं हुआ।

ध्यप्रदेश में भी हो चुका है एेसा

राजस्थान विधानसभा ही नहीं, इससे पहले मध्यप्रदेश के विधायकों ने भी अपने खुद के विधानसभा भवन के वास्तु पर सवाल खड़े कर दिए थे। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक केपी सिंह ने चौदहवीं विधानसभा में 9 विधायकों की मृत्यु को लेकर विधानसभा भवन में वास्तुदोष की आशंका जाहिर की थी। मध्यप्रदेश के कई मंत्रियों ने इस मांग का समर्थन किया था।

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