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हनुमान बेनीवाल की ‘हुंकार रैली’ के बाद राजेंद्र राठौड़ ने पुलिस की रिपोर्ट को बयान क्यों बनाया?

1st November 2018   ·   0 Comments

जयपुर।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में 29 अक्टूबर को ऐतिहासिक रैली कर निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल ने अपनी नई पार्टी के नाम का ऐलान कर दिया। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बेनीवाल के नए सियासी दल का नाम होगा, वहीं चुनाव चिन्ह जल की बोतल रखा गया है।

उन्होंने इस मौके पर राजस्थान के कोने-कोने से आए लाखों की तादात में युवाओं को संबोधित करते ही बीजेपी और कांग्रेस पर करारे हमले किए।

रैली को लेकर जयपुर समेत दूरदराज के जिलों से आए लोगों की भीड़ का अनुमान सब ने अपने अपने हिसाब से लगाया।

जयपुर से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबार दैनिक भास्कर ने हनुमान बेनीवाल की रैली में दो लाख से अधिक लोगों की भीड़ होने का दावा किया, वहीं राजस्थान पत्रिका ने एक लाख से ऊपर की संख्या इस हुकार रैली में होने की बात लिखी है।

कमोबेश यही संख्या राजस्थान से प्रकाशित होने वाले दैनिक नवज्योति, पंजाब केसरी, डेली न्यूज़, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और डीएनए ने भी बताई।

निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल की रैली को केंद्रीय मीडिया ने उसी तरह कवरेज दी, जैसे 5 साल पहले डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा की रैलियों को दी जाती थी।

सेंटर मीडिया ने अपने अलग-अलग रिपोर्ट्स में हनुमान बेनीवाल की हुंकार रैली में एक लाख से लेकर ढाई लाख लोगों के एकत्रित होने का दावा किया।

इधर, खुद हनुमान बेनीवाल और उनके समर्थकों ने किसान हुंकार रैली में शामिल लोगों की भीड़ को पंद्रह लाख, 16 लाख और 20 लाख तक बताया। रैली में शामिल कुछ निष्पक्ष लोगों ने रैली में करीब 2 से ढाई लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया है।

निर्दलीय विधायक और सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा सहित मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर तीखे शब्द बाण छोड़ने के लिए मशहूर हनुमान बेनीवाल की रैली में सबसे कम भीड़ पुलिस प्रशासन द्वारा दी गई रिपोर्ट में बताया गया है।

खुफिया एजेंसियों और जयपुर पुलिस की अलग अलग रिपोर्ट्स में सरकार को बताया गया है, कि हनुमान बेनीवाल की इस रैली में 50 से 60 हजार “हताश लोगों का जमावड़ा” हुआ है।

मजेदार बात यह है कि राजस्थान पुलिस द्वारा राज्य सरकार को दी गई रिपोर्ट में यह कहा गया है कि बेनीवाल की रैली में 60-70 हजार “हताश लोगों का जमावड़ा” था। (रिपोर्ट की कॉपी हमारे पास उपलब्ध है)

मजेदार बात यह है कि रैली के बाद शाम को और दूसरे दिन बीजेपी द्वारा जारी बयानों में उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जो पुलिस और खुफिया एजेंसियों द्वारा सरकार को दी गई रिपोर्ट्स में उल्लेखित थे।

सरकार में पंचायती राज मंत्री और बीजेपी के बड़े नेता राजेंद्र सिंह राठौड़ ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को दिए गए अपने बयान में हनुमान बेनीवाल की रैली को फ्लॉप कहते हुए “हताश लोगों का जमावड़ा” करार दिया।

अब सोचने वाली बात यह है कि राजस्थान में बीजेपी के द्वारा दिया गया बयान राजस्थान पुलिस और खुफिया एजेंसियों द्वारा दी गई रिपोर्ट के बयान से मेल कैसे खाता है?

सवाल यह भी है कि क्या बीजेपी के पास बोलने के लिए शब्दों की कमी है, जो पुलिस के द्वारा लिखे गए (हताश लोगों का जमावड़ा) शब्द यूज कर बेनीवाल की रैली को विफल करार देने का प्रयास किया जा रहा है?

सवाल सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के लिए भी है कि राज्य में 5 साल पहले (2003 से 2008) और 5 साल अब राज करने के बाद भी लाखों की तादात में हताश लोग कैसे हैं, जबकि बीजेपी की यही सरकार प्रदेश में सुशासन और स्वराज का दावा करती रही है?

सवाल यह भी है कि राजस्थान में होने वाली तकरीबन सभी छोटी-बड़ी रैलियों को लेकर खुफिया एजेंसियों और राज्य पुलिस के द्वारा सरकार को वास्तविक संख्या क्यों नहीं बताई जाती है?

जबकि, सही तादाद बताने से पुलिस की ये रिपोर्ट्स प्रशासनिक दृष्टि से और सरकार के द्वारा भविष्य में की जाने वाली तैयारियों की दृष्टि से काफी मददगार साबित हो सकती है?

इधर, 2 दिन से सोशल मीडिया पर जारी बहस में कुछ निष्पक्ष लोगों की टिप्पणियां भी हनुमान बेनीवाल की रैली को सफल बताने के लिए काफी है, तो दूसरी ओर उनके समर्थकों द्वारा इस रैली को राजस्थान की अब तक कि सबसे बड़ी रैली करार दिया जा रहा है।

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