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डीजीपी ने किया राजस्थान पुलिस के शहीदों को नमन

20th October 2018   ·   0 Comments

जयपुर । प्रदेश के डीजीपी ओपी गल्होत्रा ने अपने एक संदेश में राजस्थान पुलिस के शहीदों को नमन किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा है कि राजस्थान की वीर धरा अपनी आन-बान और शान के साथ ही मातृभूमि की रक्षा के लिये सर्वस्व समर्पण करने के लिये विख्यात रही है। शौर्य के पुण्य प्रतीक महाराणा प्रताप जैसे वीर और पराक्रमी राजस्थान के वीर सपूत अपनी मातृृभूमि की रक्षा के लिये अपने प्राणों की आहूति देने में कभी पीछे नहीं रहे। प्राचीन ओर मध्य काल में ही नही वरन वर्तमान समय में भी राजस्थान के वीर सपूत अपनी गौरवशाली और वीरतापूर्ण परम्पराओं के साथ रक्षाबलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने संदेश में कहा कि आजादी के बाद देश की 563 रियासतों का एकीकरण कर विभिन्न राज्य बने और इसी क्रम में राजस्थान का गठन हुआ। यहां की रियासतों के विलय के साथ ही उनके पुलिस बलों को मिलाकर राजस्थान पुलिस की स्थापना की गई। पुलिस महानिरीक्षक आर बनर्जी ने 7 अप्रैल 1949 को राजस्थान पुलिस के मुखिया का पदभार संभाला तथा जनवरी 1951 में राजस्थान पुलिस सेवा का गठन किया गया।

राजस्थान के बहादुर पुलिस अधिकारियों ने सदैव अपने कर्तव्यों और दायित्वों का ज़िम्मेदारी से निर्वहन कर अपनी गौरवशाली परमपराओं को निरन्तर आगे बढाया है। राजस्थान पुलिस के अनेक पराक्रमी पुलिसकर्मियों ने राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिये अपनी कुरबानी दी है।
भारतीय पुलिस के 10 जवानों की एक छोटी टुकड़ी ने आज से लगभग 59 वर्ष पूर्व 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के दुर्गम क्षेत्र हॉट सिंप्रग्स में चीनी सेना से मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये थे। इन दिवंगत शूरवीरों की स्मृति में प्रति वर्ष 21 अक्टूबर को देश भर में पुलिस शहीद दिवस का आयोजन कर उन्हें श्रृद्धान्जलि अर्पित की जाती है।

राजस्थान के पुलिसकर्मियों ने भी अनेक अवसरो पर देश और समाज की रक्षा के लिये अपनी शहादत दी है। बीएसएफ के गठन से पूर्व राजस्थान से लगती देश की सीमाओं की रक्षा करने की जिम्मेदारी आरएसी की थी। राजस्थान पुलिस की आरएसी की 7वीं बटालियन का मुख्यालय जोधपुर में था और इस बटालियन की कई कंपनियां भारत-पाक सीमा पर तैनात थी।
पाकिस्तान की सेनाओं ने 1965 में भारत पर हमला कर जैसलमेर से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की। थल और वायु सेना के उस क्षेत्र से काफी दूरी पर होने के कारण आरएसी के समक्ष शत्रु सेना से राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा करने की कठिन चुनौती उत्पन्न हो गई। पैंटन टैंक, संरक्षित वाहन और भारी तोपखाने के साथ हजारों की संख्या में आये पाकिस्तान सैनिकों का मुकाबला करने के लिए सीमित कारतूस व 303 राइफलों के साथ आरएसी की केवल एक सेक्शन मौजूद थी। इस स्थिति में आरएसी कर्मियों के लिये मौके से भागकर अपना जीवन बचाने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने साहस और बहादुरी के साथ दुश्मन का सामना कर पाकिस्तानी सेना को चौंका दिया। पाकिस्तानी सेना ने अपनी आर्टिलेरी द्वारा तेजी से फायरिंग शुरू कर दी लेकिन आरएसी कर्मियों नेे शहादत की मिसाल कायम की। उन्होंने आखरी सांस तक “भारत माता की जय“ और “आरएसी अमर रहे’’ के नारे लगाते हुए पाकिस्तानी सेना से लड़ना जारी रखा।
देश भक्ति और साहस का परिचय देकर 13 सितम्बर 1965 को शहीद होने वाले इन अमर शहीदों में हैड काॅन्स्टेबल उमापति, समुन्दर सिंह व जगत सिंह तथा काॅन्स्टेबल सोहन सिंह, कृपाल सिंह, बुद्ध सिंह, लेख राम, पेमा राम व सुजान सिंह शामिल थे।
देश के सम्मान की रक्षा करते हुए पुलिस कर्मियों के सर्वोच्च बलिदान की यह अत्यन्त दुर्लभ घटनाओं में से एक है। उनके बलिदान ने आरएसी और राजस्थान पुलिस के इतिहास में षौर्य ओर पराक्रम का एक गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ा है। उनका यह बलिदान समस्त पुलिस कर्मियों को मातृभूमि की रक्षा और सर्वस्व समर्पण के साथ ज़िम्मेदारी निभाने के लिये प्रेरित करता है।
आरएसी ने अपनी बहादुरी का परिचय राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा के साथ ही आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भी दिया है। तत्कालीन समय में डकैती के लिये कुख्यात धौलपुर में तैनात आरएसी की पहली बटालियन ने डकैतों की चुनौतियों का बहादुरी से सामना किया। वर्ष 1965 में ठिठुरती ठण्ड के दौरान आरएसी को डकैतों द्वारा गांवों को लूटने की सूचना मिलते ही आरएसी कर्मियों ने अपनी 303 राइफलों के साथ घुप अंधेरे में डकैतों की तलाश प्रारम्भ कर दी। बीहडों के बीच अचानक टीलों पर छुपकर बैठे डकैतों ने गोलियों की बौछार कर दी। इससे आरएसी का एक जवान शहीद हो गया लेकिन शेष जवानों ने सतर्कता व सावधानी से पोजीशन ली और क्रूर डकैतों की चुनौती का जवाब दिया।
धोलपुर जिले के थोर ग्राम में 18 घंटों की लगातार फायरिंग के बाद कई डकैतों की मौत हो गई और गिरोहों को मिटा दिया गया। बर्बर डकैतों से नागरिकों और संपत्ति की रक्षा करने के लिये प्लाटून कमांडर हनुमान सिंह, हैड काॅन्स्टेबल डूंगर राम, काॅन्स्टेबल री चन्दरसिंह, जसवंत सिंह,मांगी लाल,मुरारी लाल, तेजपाल सिंह व बेजू राम ने 2 दिसम्बर 1965 को अपना सर्वस्व त्याग कर दिया।

राजस्थान पुलिस के जवानों ने जान-माल की रक्षा करने के लिये अनेक अवसरों पर त्याग और बलिदान का उदाहरण प्रस्तुत किया है। विगत दिनों 6 अक्टूबर को सीकर जिले के फतेहपुर थानाधिकारी मुकेश कानूनगो और काॅन्स्टेबल रामप्रकाश बदमाशों की गोलियों का शिकार हो गये।
हम सब प्रदेशवासियों और विशेष रूप से राजस्थान पुलिस को अपने अमर शहीदों की शहादत पर गर्व है।

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