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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जताई असहमति

6th October 2018   ·   0 Comments

सहमति से बने समलैंगिक संबंध को अपराध के दायरे से बाहर करने के सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने असहमति जाहिर की है। शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि वे सर्वोच्च अदालत के इस फैसले से सहमत नहीं है, जिसमें कहा गया है कि यौन रूझान स्वतंत्र अभिव्यक्ति का हिस्सा है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि उन्हे ऐसा लगता है कि स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, जेल या सेना के मोर्चे पर समलैंगिक गतिविधि के किसी भी स्वरूप को रोके जाने पर सवाल उठता है। जेटली ने असहमति जताते हुए कहा कि यदि भारत में ऐसा होने लगे तो फिर देश की पारिवारिक व्यवस्था पश्चिम की पारिवारिक व्यवस्था में बदल जाएगी।

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इतिहास का हिस्सा बनने के लिए हम एक कदम आगे बढ़ जाते हैं

आपको बता दें कि आगे जेटली ने कहा कि समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर करने का फैसला ठीक है लेकिन दिक्कत वहां हैं जब इन ऐतिहासिक फैसलों को लिखा जाता है। क्योंकि आप आगे बढ़कर इतिहास का हिस्सा बनना चाहते हैं और इसलिए आप एक कदम आगे चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि वह अदालत के तर्क से पूरी तरह सहमत हैं कि यौन संबंध की गतिविधियां संविधान के अनुच्छेद 21 का भाग है, जो जीवन के अधिकार और जेंडर पर भेदभाव नहीं करने की गारंटी देता है। इसके बावजूद उन्होंने यह कहा कि यौन संबंध की गतिविधि स्वतंत्र अभिव्यक्ति का हिस्सा है, वे इस बात से सहमत नहीं हैं। जेटली ने आगे कहा कि जब आप इसे मौलिक अधिकार में शामिल करते हैं या कहते हैं कि यह स्वतंत्र अभिव्यक्ति है तब आप स्कूल, कॉलेजों, छात्रावासों, जेल, सैन्य इकाई में समलैंगिक या बाईसेक्सुअल, यौन गतिविधि के किसी भी रूप को कैसे रोकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि 377 पर विचार विमर्श करने की आवश्यकता है।

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