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आॅर्गन सेंटर के शिलान्यास से पहले हो सकता है एसएमएस में हार्ट ट्रांसप्लांट

8th September 2018   ·   0 Comments

-ट्रोमा सेंटर के पीछे बनेगा आॅर्गन ट्रांसप्लांट सेंटर
जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में जल्द हार्ट ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। एसएमएस अस्पताल प्रशासन ने हार्ट के जरूरतमंद मरीजों का पंजीकरण शुरू कर दिया है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि अब जब भी अस्पताल में कोई ब्रेनडेड मरीज आएगा, तो उसका लिवर, किडनी की तरह हार्ट का ट्रांसप्लांट भी एसएमएस में ही किया जाएगा।

अगले माह की 3 तारीख को अस्पताल के ट्रोमा सेंटर के पीछे आॅर्गन ट्रांसप्लांट सेंटर का सीएम वसुंधरा राजे व केंद्रीय चिकित्सा मंत्री जेपी नड्डा के द्वारा शिलान्यास किया जाएगा। इस 6 मंजिला भवन के लिए काम शुरू किया जा चुका है। भवन व मशीनें लगने के बाद यहां पर 21 तरह के प्रत्यारोपण हो सकेंगे। राज्य व केंद्र सरकार 40:60 के औसम से बजट दे रहे हैं। कुल बजट अभी 200 करोड़ रखा गया है। उससे पहले अस्पताल एक हार्ट ट्रांसप्लांट करने में जुटा हुआ है। माना जा रहा है कि बीते दिनों एक प्रत्यारोपण को लेकर किरकिरी होने क बाद अस्पताल प्रशासन अपने उपर लगे आरोपों के दाग धोने का प्रयास कर रहा है। एसएमएस अधीक्षक डीएस मीणा ने बताया कि किडनी व लीवर के बाद अब अस्पताल में जल्द ही हार्ट ट्रांसप्लांट भी शुरू होगा। अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली है। मीणा का दावा किया कि इस बार एसएमएस अस्पताल में ही कैडेवर केस में हार्ट ट्रांसप्लांट एसएमएस में ही किया जाएगा।

आपको बता दें कि अब तक कुल 16 कैडेबर हार्ट ट्रांसप्लांट हुए हैं। जिनमें से 5 हार्ट ट्रांसप्लांट निजी अस्पताल में हुए, जबकि 11 दिल प्रत्यारोपण के लिए राजस्थान से बाहर भेजने पड़े हैं। बताया जाता है कि इसको लेकर मोटा खर्च होता है। ऐसे में निजी अस्पताल का खर्च जरूरतमंद परिवार उठा सकते हैं, लेकिन एसएमएस अस्पताल इस खर्चे को उठाने में सक्षम नहीं है। अस्पताल प्रशासन की जल्द हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू करने की घोषणा ने कई जरूरतमंद परिवारों में नई उम्मीद जगी है। देखना दिलचस्प होगा कि अस्पताल प्रशासन अपने दावे को कितना खरा उतरता है।

अंगदान की जरूरत क्यों-

– मुख्य क्रियाशील अंग खराब हो जाने से हर साल 5 लाख से ज्यादा लोग दम तोड़ रहे हैं।
-वर्ष 2016 में 2.50 लाख लोग किडनी खराब होने की समस्या से ग्रस्त हुए, जबकि ट्रांसप्लांट की संख्या 2045 रही।
-80 हजार लोगों को लीवर की दिक्कत हुई, जबकि कैडेवर मात्र 733 किए गए हैं।
-हार्ट के मरीजों को 50 हजार दिल की जरूरत के मुकाबले 217 कैडेवर ट्रांसप्लांट हो पाए।

अंगदान में अब तक यह हुआ है-
-29 ब्रेनडेड पेंशेट्स का हो चुका कैडेबर ट्रांसप्लांट।
-90 लोगों के आॅर्गन देकर बचाई जान।
-51 मरीजों को किडनी, 27 मरीजों को मिला लीवर।
-16 दिल धडक रहे जरूरतमंद मरीजों के सीने में।

इतने समय तक रखे जा सकते हैं अंग सुरक्षित-

-दिल 4-6 घंटे तक
-फैंफडे 4-8 घंटे तक
-लिवर 12-15 घंटे तक
-पैंक्रियाज 12-24 घंटे तक
-किडनी 24-48 घंटे तक

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