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शिक्षक दिवस पर संस्कृत शिक्षकों का ‘अपमान’ क्यों?

5th September 2018   ·   0 Comments

जयपुर।
राज्य सरकार शिक्षक दिवस पर 5 सितम्बर को 33 शिक्षकों को सम्मान देने जा रही है। साल 2013, यानि वर्तमान सरकार के गठन के बाद नियुक्त विभिन्न श्रेणियों में तकरीबन 50 हजार शिक्षकों का जयपुर में आमंत्रित किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी कर सभी को सम्मेलन में आने को कहा है। लेकिन इसी शिक्षा विभाग में नियुक्त हुए करीब 1500 शिक्षकों की पूरी तरह से अनदेखी कर दी गई है। इनको न तो सम्मान देने के योग्य माना गया है और न ही समारोह में बुलाया गया है। ऐसे में ये शिक्षक अपमानित तो महसूस कर ही रहे हैं, साथ ही राज्य सरकार की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मामला संस्कृत शिक्षा विभाग का है। इस महकमे के एक भी शिक्षक को ‘श्रीगुरुजी सम्मान समारोह’ के लिए नहीं बुलाया गया है, जबकि विभाग में भी वर्ष 2013 के बाद करीब 1500 संस्कृत शिक्षकों की भर्ती हुई थी। संस्कृत शिक्षा विभाग में आज तक राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल होने के विषय में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। ऐसे में शिक्षक इस मामले को लेकर परेशान हैं, बल्कि चिंतित भी हैं। विभाग के शिक्षकों ने बताया कि सामान्य शिक्षा में तो शिक्षकों के आईडी कार्ड डीईईओ स्तर पर बनाया जा रहा है, लेकिन संस्कृत शिक्षा का पूरी तरह से नकार दिया गया है।

इनको मिलेगा सम्मान, फिर संस्कृत शिक्षकों का क्यों हो अपमान

अतिरिक्त प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा में प्रत्येक जिले के 1 सर्वश्रेष्ठ शिक्षक को श्रीगुरुजी अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा, जिसमें पुरस्कार के तहत 11000 रुपए और स्मृति चिन्ह दिया जाएगा। संस्कृत शिक्षा के शिक्षकों को छोड़कर तकरीबन सभी को इसमें शामिल किया गया है। इस बारे में माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक नथमल डिडेल से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।

इनका कहना है-
प्रदेश शासन के द्वारा संस्कृत के प्रति जो सौतेला व्यवहार किया जा रहा है, वह संस्कृति के विपरीत आचरण है। शिक्षा जगत में सामान्य एवं संस्कृत शिक्षा में भेद किया जा रहा है, जो उचित नही है। संस्कृत शिक्षकों को भी सामान्य शिक्षा के शिक्षकों की तरह समारोह में प्रतिभागी बनाया जाना चाहि और उनका भी सम्मान किया जाना चाहिए।

-डॉ. राजकुमार जोशी, महामंत्री राजस्थान संस्कृत साहित्य सम्मेलन जयपुर

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