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दैनिक जागरण और अमर उजाला अखबार पर जैन समाज में गहरा रोष क्यों?

3rd September 2018   ·   0 Comments

नई दिल्ली। देश के दो प्रतिष्ठित अखबार जैन समाज के निशाने पर आ गए हैं। दोनों को लेकर जैन समाज ने गहरी प्रतिक्रिया देते हुए माफी मांगने को कहा है। जैन समाज ने दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि देश के दो प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के माध्यम से दिगम्बर जैन समाज अपमानित हो रहा है। इस बारे में सोशल मीडिया पर समाज को एक होकर इन समाचार पत्रों का खुलेआम विरोध करने का आव्हान किया गया है।

अपने संदेश में समाज ने कहा है कि दुर्भाग्य की बात है कि एक तरफ पूरा जैन समाज मुनि तरुण सागर महाराज के देवलोक गमन पर दुख प्रकट कर रहा है, और दूसरी तरफ देश के दो प्रतिष्ठित समाचार पत्र, दैनिक जागरण और अमर उजाला उन्हीं तरुण सागर महाराज के नाम पर खुलेआम जैन समाज को अपमानित कर रहा है। कहा जा रहा है कि इससे समाज की धार्मिक भावना को ठेस पहुंच रही है।

मामला क्या है?

शनिवार को मुन देवलोक गमन हो गया था। जिसके बाद उनकी अंतिम क्रिया विधि प्रारम्भ हुई। समाज का कहना है कि इसमें इन दोनों अखबारों ने मुनि की अंतिम यात्रा का मज़ाक बनाया है। समाज का कहना है कि दोनों अखबारों ने “उनकी डोली उठाने की बोली”, “उन पर सिक्के उछालने की बोली”, “गुलाल उड़ाने की बोली”, “मुनिश्री पर कपड़ा उठाने की बोली”, आदि का होना बताया है, जबकि वास्विकता में इस प्रकार की कोई बोली लगी ही नहीं।

इस मामले की हमनें पड़ताल की तो जानकारी मिली कि यह बोलियां 19 अगस्त 2018 को देवलोक हुए श्वेताम्बर जैन संत रूपमुनि जी से जुडी हुई हैं। पिछले महीनें पाली के पास जैतारण राजस्थान में श्वेताम्बर जैन मुनि रूपमुनि का देवलोक गमन हुआ था, जिस समय प्रकाशित बोलियां लगी थीं। उस समय की बोलियों को लेकर राजस्थान सहित देश के अधिकांश अखबारों और न्यूज पोर्टल्स ने खबरें प्रकाशित की थीं।

वास्विकता यह है

मुनि तरुण सागर महाराज के देवलोक गमन पर दिगम्बर परम्पराओं के तहत अंतिम क्रिया सम्पन्न हुई थीं, केवल शांतिधारा की बोली लगी थी। जैन समाज का कहना है कि जो बोलियां इन समाचार पत्रों ने प्रकाशित की हैं, वह सरासर गलत है। निंदनीय है। जैन समाज का यह भी कहना है कि जिस संत ने पूरे जीवन कपड़ों का त्याग कर दिया, उनके अंतिम यात्रा में कोई कैसे उन्हें कपड़ा ओढा सकता है? दिगम्बर जैन परम्पराओ में समाधी का अति महत्वपूर्ण स्थान है। मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर दिगम्बर संतो की अंतिम यात्रा में डोली (कन्धा देने) की कोई बोली नहीं लगती है।

समाज का कहना है कि दिगम्बर जैन परम्पराओ में संलेखना मृत्यु नहीं, यह एक महोत्सव है। इस महोत्व में हजारों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं, वहां कैसे सिक्के उछाल कर हिंसा फैलाई जा सकती है? समाज का कहना है कि विरोध केवल इस बात का है, कि जो समाज की परम्पराओं में ही सम्मिलित नहीं, उस खबर का प्रकाशन बिना किसी तथ्यों की जानकारी से किया गया? वो भी तब जब दिगम्बर जैन मुनि तरुण सागर महाराज का देवलोक गमन हुआ।

जैन समाज ने यह भी कहा है कि जो संत पूरे देश और सभी समाजों की आस्था के मुख्य केंद्र थे। जिनको देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्री, अनेक राज्यों के मुख्यमंत्री और दूसरे राजनेता, देश का सर्व समाज उन्हें अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहा है, जब उन्हें आस्था के अनुसार जरूरी सम्मान दे रहे, तब यह अखबार ऐसी हरकतें कर रहे हैं।

रोष व्यक्त करते हुए दिगम्बर जैन समाज ने कहा है कि यह अपमान है। इन समाचार पत्रों ने समाज की भावनाओं को कलंकित किया है। समाज ने मांग की है कि दैनिक जागरण और अमर उजाला को अपनी गलती स्वीकार कर सत्य का प्रकाशन कर समाज से मांफी मांगनी चाहिए। अगर मांफी नहीं मांगते हैं, तो जैन समाज देश की सरकार से अपील करती है कि ऐसे झूठे समाचार पत्रों के प्रकाशन पर रोक लगाएं, अन्यथा जैन समाज सरकार के खिलाफ भी जा सकता है। समाज का कहना है कि किसी भी सूरत में जैन समाज अपने धर्म और परम्पराओं का मजाक नहीं बनने देगा, ना ही किसी भी प्रकार अपमान सहन करेगा।

समाज ने यह भी चेतावनी दी है कि दैनिक जागरण और अमर उजाला जिस खबर का प्रकाशन कर समाज का अपमान किया है, समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है, उसपर जैन समाज कार्यवाही करेगा। समाज कोर्ट की शरण में जाकर अमर उजाला और दैनिक जागरण पर पूरी तरह से बैन लगाने की मांग भी करेगा।

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