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राज्य विश्वविद्यालयों में अब कोई डिग्री पेंडिंग नहीं: कुलाधिपति कल्याण सिंह

3rd September 2018   ·   0 Comments

जयपुर। स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा, हर समय लहराता राष्ट्रीय ध्वज, कुलगीत और अनुसंधान पीठों की स्थापना से विश्वविद्यालयों में राष्ट्र प्रेम और देश भक्ति का नया माहौल बना है। विश्वविद्यालयों के इतिहास, उद्वेश्यों, विशषताओं और राज्य की शौर्य गाथा पर आधारित कुलगीतों से परिसरो में गौरव गान हो रहा है।

दीक्षांत समारोहों में भारतीय पोशाक में पदक और उपाधि ले रहे छात्र-छात्राओं के दमकते चेहरों पर उल्लास देखते ही बनता है। राज्य विश्वविद्यालयों में अब कोई डिग्री पेंडिंग नहीं है। दीक्षांत समारोह नियमित हो रहे हैंं। अब उच्च शिक्षा के छात्र-छात्राओं को गांवों से जोड़कर मानव सेवा का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। राज्यपाल कल्याण सिंह की पैनी नजर से विश्वविद्यालयों की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्ता दिखाई दे रही है। देश के दूसरे राज्यों में भी राजस्थान की उच्च शिक्षा में किये गये नवाचारों को अपनाया जा रहा है।

कुलाधिपति की परिकल्पना से उच्च शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव

कुलाधिपति कल्याण सिंह की परिकल्पना और निरन्तर माइक्रो समीक्षा से विश्वविद्यालयों की कार्य संंस्कृति में परिवर्तन दिखाई दे रहा है। परिसरों में पारदर्शिता से फैसले लिए जा रहे हैं। श्री कल्याण सिंह ने 4 सितम्बर, 2014 को राजस्थान के राज्यपाल पद की शपथ ली थी। सिंह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं। चार वर्षों में कल्याण सिंह ने उच्च शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन कर क्रांतिकारी बदलाव ला दिये हैं। इन परिवर्तनों के सकारात्मक परिणाम राज्य की उच्च शिक्षा में अब दिखाई देने लगे हैं। महापुरूषों, स्थानीय लोक देवताओं पर शोध पीठों के गठन से अनुसंधान में गुणवत्ता लाने के विशेष प्रयास विश्वविद्यालयों में अब फलीभूत हो रहे है।

 

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