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रिश्वत केस: पूर्व एसपी देसराज को तीन साल की सजा, 1 लाख जुर्माना

11th August 2018   ·   0 Comments

जज बोले- मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘नमक का दरोगा’ जैसे पुलिस अफसर चाहिए, जिसने 40 हजार ठुकरा दिए थे

चंडीगढ़। एक लाख रुपए की रिश्वत के साथ पकड़े गए आईपीएस ऑफिसर देसराज सिंह को शुक्रवार को सीबीआई कोर्ट ने 3 साल की सजासुनाई औरएक लाख रुपए जुर्माना भी लगाया है। फैसला सुनाते हुए सीबीआई कोर्ट की स्पेशल जज गगनगीत कौर ने कहा कि इस केस से उन्हें मुंशी प्रेमचंद की 1925 में छपी कहानी ‘नमक का दरोगा’ की याद आ गई। उसमें दरोगा के किरदार ‘मुंशी वंशीधर’ ने रसूखदारों और नमक के तस्करों की 40 हजार रुपए की रिश्वत के ऑफर को ठुकरा दिया था। जबकि उस समय 40 हजार रुपए बहुत बड़ी रकम थी। हमारी सोसायटी को ‘मुंशी वंशीधर’ जैसे ही ईमानदार पुलिस अफसरों की जरूरत है।

जज ने कहा कि इस कहानी की महत्ता इस बात से लगाई जा सकती है कि इसे स्कूल की सिलेबस में भी शामिल किया गया। वहीं, इस केस से पता चलता है कि करप्शन का कैंसर किस तरह हमारे सिस्टम में फैल चुका है। ये केस अपने आप में एक यूनीक केस है, जिसमें शिकायत देने वाला खुद एक पुलिस अफसर था, जिसने अपने ही सीनियर अफसर पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए।

कस्टडी में नहीं लिया

बुधवार को कोर्ट ने देसराज को दोषी करार दिया था। सीबीआई ने देसराज को 18 अक्टूबर 2012 को सेक्टर-26 थाने के तत्कालीन एसएचओ अनोख सिंह की शिकायत पर ट्रैप लगाकर गिरफ्तार किया था। अनोख सिंह से 1 लाख रिश्वत लेने के आरोप थे। सजा सुनाए जाने के बाद देसराज के वकील विशाल गर्ग नरवाणा ने कहा कि उनके लिए बड़ा रिलीफ है कि देसराज को कस्टडी में नहीं लिया गया। अब वे कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

बच्चों की बीमारी का दिया हवाला
देसराज के वकील की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उनकी 9 साल की बेटी अर्ब्स पाल्सी बीमारी से पीड़ित है, जबकि बेटे को जी6 पीएलडी है। इस बीमारी में उन्हें ब्लड की काफी जरूरत पड़ती रहती है। उनकी पत्नी डायबटिक पेशेंट है। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी में उनके परिवार की देखरेख करने वाला कोई नहीं होगा। उनके परिवार की हेल्थ प्रॉब्लम का हवाला देकर बचाव पक्ष के वकील ने सजा पर नरमी बरते जाने की मांग की।

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