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दिल्ली: विधानसभा में मानसून सत्र के आखिरी दिन सरकार-अफसरों में टकराव

11th August 2018   ·   0 Comments

कैबिनेट ने 1.4 लाख सीसीटीवी लगाने के प्रस्ताव को दी मंजूरी, सीएस बोले- जल्दबाजी में लिया गया फैसला

नई दिल्ली.दिल्ली कैबिनेट ने पांच दिवसीय मानसून सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए 1.4 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सीएम अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में यह जानकारी दी।

इस दौरान उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। साथ ही सीसीटीवी प्रोजेक्ट को अक्टूबर 2015 से यानी करीब तीन साल से लटकाने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार बताया। सीएम ने कहा- ‘एलजी की ओर से गठित कमेटी ने सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए लाइसेंस जरूरी कर दिया। मैं भाजपा से पूछना चाहता हूं कि सरकार ने राफेल डील से कम कमाई की है, जो अब लाइसेंस से कमाना चाहती है।’ विधानसभा में मोदी विरोधी नारे भी लगाए गए। उधर, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव (सीएस) अंशु प्रकाश ने एक नोट लिखकर कहा कि सीसीटीवी कैमरा लगाने का प्रस्ताव कैबिनेट में नियमानुसार नहीं लाया गया है। उन्होंने इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया गया।

सीएस ने नोट में लिखाकैबिनेट में नियमानुसार नहीं रखा गया प्रस्ताव:जानकारों के अनुसार, सीएस के नोट में ऐसा नहीं लिखा है कि सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाने हैं बल्कि यह लिखा है कि तीन साल से चल रहे इस प्रोजेक्ट के प्रस्ताव जल्दबाजी में न लाया जाए। नियमानुसार कैबिनेट के समक्ष इस प्रस्ताव को दो दिन पहले भेजा जाना चाहिए था, जिसे कुछ घंटे पहले ही सदन में रखा गया। दरअसल सीसीटीवी कैमरे लगाने के टेंडर को बिना प्रशासनिक अनुमति के ही पास कर दिया गया है। इसके टेक्निकल स्पेशिफिकेशन भी बना दिए, जबकि यह नहीं बताया गया कि इसमें क्या चाहिए? वहीं, प्रत्येक विधानसभा में 2000-2000 सीसीटीवी कैमरे लगने हैं। कई विधानसभा छोटी हैं तो कहीं पहले से ही सीसीटीवी कैमरे लगे है। लेकिन इन पहलुओं का अध्ययन नहीं किया गया।

सीएम बोलेएलजी और उनकी पुलिस सुरक्षा देने में नाकाम रहे:विधानसभा में सीएम ने कहा कि एलजी और उनकी टीम दिल्लीवालों को सुरक्षा देने में नाकाम रहे हैं। लेकिन अब राजधानी में सीसीटीवी कैमरे लग जाने के बाद अपराध में 40 से 50 फीसदी की कमी आएगी। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरे लगाने की फाइल तीन साल से एक टेबल से दूसरे टेबल पर घुमाई जाती रही। लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार इस पर ठोस फैसला लेने में सक्षम हुई तो सीएस से एक नोट लिखवा कर कहा गया कि यह प्रोजेक्ट जल्दबाजी में शुरू किया गया। सीएम ने कहा कि सरकार ने तीन साल पहले ही इस प्रोजेक्ट का ठेका दे दिया था। अगर इसमें अड़चनें पैदा नहीं हुई होतीं तो दिल्ली में दो साल पहले ही सीसीटीवी कैमरे लग जाते।

अलका लांबा ने सीएस को हटाने का रखा था प्रस्ताव:विधानसभा में सीएस को हटाने को लेकर भी एक प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव अलका लांबा ने रखा था। उन्होंने कहा कि सीएस ने आलाकमान के इशारे पर सीसीटीवी लगाने को जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया है। उन्हें तुरंत हटाया जाए। हालांकि, जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अधिनियम-1991 में साफ है कि सीएस के ट्रांसफर का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। इसलिए विधानसभा में ऐसे प्रस्ताव पास करने का कोई मतलब ही नहीं बनता।

20 मिनट तक स्थगित रही सदन की कार्यवाही:सीसीटीवी लगाने के प्रस्ताव को सदन में पास कर दिया गया, लेकिन इस पर विपक्ष की प्रतिक्रिया नहीं लेने का नेता प्रतिपक्ष ने विरोध किया। भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता, ओपी शर्मा और जगदीश प्रधान वेल में जाकर समय मांगने लगे। इसी दौरान स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए अपराह्न 4.15 बजे तक स्थगित कर दी।

नेता प्रतिपक्ष को मार्शलों से बाहर निकलवा दिया गया:अपराह्न 4.15 बजे जब दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विजेंद्र गुप्ता मंडावली में तीन बच्चियों की मौत के मामले में चर्चा करने की मांग को लेकर वेल में चले गए। इस पर स्पीकर ने उन्हें मार्शलों के जरिए सदन से बाहर निकलवा दिया।

कोर्ट जाने वाले अधिकारियों को खुद उठाना होगा खर्चा: अब विधानसभा कमेटी के सामने पेश नहीं होने से बचने के लिए कोर्ट जाने वाले अधिकारियों को खुद खर्च उठाना होगा। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अधिकारी कमेटियों के सामने आने से बचने के लिए कोर्ट चले जाते हैं। ऐसे अधिकारियों से सख्ती से निपटा जाएगा।

बंदरों-कुत्तों की आबादी कम करने को कमेटी गठित: बंदरों और कुत्तों को आबादी कम को सोमनाथ भारती की अध्यक्षता में सौरभ भारद्वाज, ओपी शर्मा, अलका लांबा और राजेश ऋषि की पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी बंदरों और कुत्तों की आबादी कम करने के उपाय सुझाएगी।

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