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भारत के साथ रक्षा सहयोग पर US सदन में बिल पास, 40 लाख करोड़ करेगा खर्च

15th July 2017   ·   0 Comments

यूएस कांग्रेस के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने भारत के साथ रक्षा सहयोग को लेकर एक बिल पास किया है।

वॉशिंगटन. यूएस कांग्रेस के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने भारत के साथ रक्षा सहयोग को लेकर एक बिल पास किया है। इसमें रक्षा सहयोग बढ़ाने पर 621.5 बिलियन डॉलर (करीब 40 लाख करोड़ रुपए) खर्च का प्रोविजन किया गया है। नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट (NDAA) 2018 को हाउस ने 81 के मुकाबले 344 वोटों से पास किया। इस एक्ट पर अमल इस साल 1 अक्टूबर से होगा।

– न्यूज एजेंसी के मुताबिक भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद एमी बेरा ने इस बिल में एक अमेंडमेंट (संशोधन) पेश किया था, उसे हाउस ने मंजूर कर लिया है। इस अमेंडमेंट में कहा गया है कि सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट से सलाह मशविरा कर दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए एक स्ट्रैटजी बनाएंगे।

– एमी बेरा ने कहा, “अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना और भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। दोनों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए एक स्ट्रैटजी बनाना

बहुत अहम है। इस अमेंडमेंट को पास करने के लिए मैं हाउस का आभारी हूं।”

– “अब मुझे डिफेंस डिपार्टमेंट की स्ट्रैटजी का इंतजार है, जिसमें अहम मुद्दों जैसे- साझा सुरक्षा चुनौतियां, साझेदारों और सहयोगियों की भूमिका के साथ ही साइंस-टैक्नोलॉजी में सहयोग के क्षेत्रों पर गौर किया जाएगा। अमेरिका और भारत के बीच सहयोग से न सिर्फ हमारी सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि इससे 21वीं सदी की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में हमारी काबिलियत भी बढ़ेगी।”

आगे क्या?
– NDAA के पास होने के बाद अब सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस और सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के पास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के मकसद से स्ट्रैटजी बनाने के लिए 180 दिनों का समय है। इस एक्ट को अब सीनेट में पास होने के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद इसे कानून की शक्ल देने के लिए प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प के पास हस्ताक्षर के लिए व्हाइट हाउस भेजा जाएगा। इस बिल को मोदी के यूएस दौरे के बाद दोनों देशों के बीच गहरे होते संबंधों के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या है NDAA-2018?
– हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास NDAA-2018 के तहत स्टेट डिपार्टमेंट और पेंटागन दोनों देशों की साझा सुरक्षा चुनौतियों को लेकर एक स्ट्रैटजी बनाएंगे। इसमें अमेरिकन पार्टनर्स और सहयोगियों का ख्याल रखा जाएगा। इसके अलावा इसमें सुरक्षा तकनीक और व्यापारिक पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
– स्टेट डिपार्टमेंट और पेंटागन इस बात पर भी फोकस करेंगे कि दोनों देशों के बीच कम्युनिकेशन कैसे बढ़ाया जाए और सुरक्षा समझौते के मेमोरेंडम को आगे कैसे बढ़ाया जाए।

 

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