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NSG में भारत की सदस्यता को लेकर चीन ने कहा, समर्थन नहीं करेंगे

10th October 2016   ·   0 Comments

नई दिल्ली। न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की पूर्ण सदस्यता के मुद्दे पर चीन ने कहा है कि ‘संभावनाओं’ को लेकर भारत के साथ आगे बातचीत करने के लिए तैयार है। हालांकि उसने इस बात के स्पष्ट संकेत दिए है कि वह इस मुद्दे पर भारत का समर्थन नहीं करेगा।
गोवा में होने जा रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शिरकत के लिए चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा से पहले चीन ने फिर संकेत दिए हैं कि वह न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की पूर्ण सदस्यता के मुद्दे पर समर्थन करने में असमर्थ है, हालांकि उसका कहना है कि वह
चीन के विदेश उपमंत्री ली बाओडॉन्ग ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि एनएसजी में नए सदस्यों को शामिल करने के लिए उनके नाम पर सभी मौजूदा सदस्यों को सहमत होना होता है, तथा ये नियम चीन ने नहीं बनाए हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच मतभेद को नकारते हुए कहा कि एनएसजी में शामिल होने के मुद्दे पर भारत और चीन के बीच अब तक बहुत अच्छी बातचीत हुई है, तथा मतैक्य की दिशा में बढ़ने के लिए (चीन) भारतीय पक्ष के साथ आगे बातचीत करने का इच्छुक है… इसी तरह भारत एनएसजी के अन्य सदस्य देशों के पास भी जा सकता है।
ली बाओडॉन्ग ने कहा कि इस मुद्दे पर चीन भारत के साथ मिलकर सभी तरह की संभावनाओं को तलाश करने के लिए इच्छुक है लेकिन ऐसा एनएसजी के नियमों के तहत ही होना चाहिए और नियमों का पालन सभी पक्षों को करना चाहिए। ली ने कहा कि एनएसजी के वर्तमान नियमों के अनुसार ऐसे किसी भी देश को एनएसजी की सदस्यता नहीं दी जा सकती, जिसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं किए हैं।
गौरतलब है कि एनएसजी में चीन को छोड़कर शेष सभी सदस्य देश इस मुद्दे पर भारत का समर्थन कर रहे हैं। भारत ने एनपीटी पर हस्ताक्षर करने की संभावना को नकारते हुए कहा है कि अप्रसार के क्षेत्र में भारत के ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर उसे एनएसजी का सदस्य बना लिया जाना चाहिए।

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