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‘यूनिवर्सिटी टीचरों को राहत, नहीं बढ़ेंगे पढ़ाने के घंटे’

4th July 2016   ·   0 Comments

यूजीसी ने उस प्रस्ताव को वापस लेने का ऐलान किया, जिसके तहत यूनिवर्सिटी टीचरों के काम के घंटे में हर हफ्ते दो घंटे की इजाफे की बात कही गई थी
नई दिल्ली। यूनिवर्सिटी के टीचरों के लिए राहत भरी खबर है। फिलहाल, अब उनके पढ़ाने के घंटे में बढ़ोतरी नहीं होगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपने उस प्रस्ताव को गुरुवार को वापस लेने का ऐलान किया है, जिसके तहत यूनिवर्सिटी टीचरों के काम के घंटे में हर हफ्ते दो घंटे की इजाफे की बात कही गई थी। साथ ही यूजीसी केंद्र से ट्यूटोरियल और प्रैक्टिकल को सीधे शैक्षिक कार्य में शामिल करने की सिफारिश भी करेगा। उच्च शिक्षा सचिव विनय शील ओबेराय ने गुरुवार को कहा कि काम के घंटे कम करने के यूजीसी के फैसले के बारे में जल्द ही विज्ञप्ति जारी की जाएगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मंजूरी से यूजीसी ने बीते महीने ही टीचरों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता के नियमों में बदलाव किया था। साथ ही टीचरों के शिक्षण कार्य के घंटों में इजाफा किया था। शिक्षकों ने किया था प्रस्ताव का विरोध शिक्षण कार्य के घंटे में इजाफा करने के प्रस्ताव का शिक्षकों ने विरोध किया था। विरोध को देखते हुए यूजीसी ने अपने प्रस्ताव को वापस लेने का फैसला किया। यह था प्रस्ताव पहले के नियमों के मुताबिक, प्रोफेसरों और एसोसिएट प्रोफेसरों को हफ्ते में 14 घंटे और असिस्टेंट प्रोफेसरों को 16 घंटे तक पढ़ाने होते हैं। टीचिंग के इन घंटों में ट्यूटोरियल और प्रैक्टिकल क्लास भी शामिल रहेंगे। जबकि नए प्रस्ताव के अनुसार इन घंटों में ट्यूटोरियल के घंटों को बाहर कर दिया गया है। नए नियम से कौन थे प्रभावित नए नियमों से दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में पढ़ाने वाले करीब 4500 एडहॉक टीचर प्रभावित हो रहे थे। उन पर छंटनी का खतरा मंडरा रहा था। ओबेराय ने साफ किया कि यूनिवर्सिटी या कॉलेजों से कोई छंटनी नहीं होगी। शुक्रवार को टीचर करेंगे बैठक बीते तीन हफ्तों से परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन का बहिष्कार कर रहे दिल्ली विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (डूटा) ने शुक्रवार को यूजीसी के फैसले पर विचार करने के लिए बैठक करने का फैसला किया है।

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