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तमिलनाडु की पूर्व विधायक बाबर सईद ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक के खिलाफ याचिका दाखिल की है

8th June 2016   ·   0 Comments

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक के खिलाफ एक और याचिका दायर की गई है। याचिका तमिलनाडु की पूर्व विधायक और सामाजिक कार्यकर्ता बाबर सईद ने दाखिल की है। याचिका में ट्रिपल तलाक को गैर संवैधानिक और मनमाना बताया गया है। इससे पहले उत्तराखण्ड की शायरा बानो और जयुपर की आफरीन रहमान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रिपल तलाक को चुनौती दी थी। कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन रही बाबर सईद का कहना है कि ट्रिपल तलाक का प्रावधान महिलाओं के मूल अधिकार का हनन है। सरकार की ड्यूटी है कि वह महिलाओं के मूल अधिकार की रक्षा करे। बाबर सईद ने याचिका में कहा है कि वह 30 साल से मुस्लिमों महिलाओं के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने नजदीक से मुस्लिम महिलाओं की परेशानियों और स्थिति को देखा है। ट्रिपल तलाक के कारण देशभर में मुस्लिम महिलाएं बेघर हो रही हैं। उन्हें बच्चों के साथ घर से निकाल दिया जाता है। संविधान का अनुच्छेद 14 समानता की बात करता है। अनुच्छेद 15 के तहत कहा गया है कि लिंग, धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होगा। अनुच्छेद 21 के तहत राइट टू लाइफ की बात कही गई है लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ का सेक्शन-2 संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। याचिका में काजी की भूमिका को भी चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि काजी रूटीन में ट्रिपल तलाक के मामले में सर्टिफिकेट जारी करते हैं, जबकि उनके पास लीगल अथॉरिटी नहीं है। ट्रिपल तलाक मनमाना है, ऐसे में मौजूदा ट्रिपल तलाक के प्रावधान को असंवैधानिक घोषित किया जाए। उत्तराखण्ड के काशीपुर की रहने वाली शायराबानो ने फरवरी में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एक साथ 3 तलाक कहने और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। जयपुर की 25 वर्षीय आफरीन रहमान को स्पीड पोस्ट के जरिए तलाक दिया गया था। उसने भी याचिका दाखिल कर इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

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