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पुलवामा अटैक: शहीदों के परिजन को 25-25 लाख की आर्थिक सहायता देगी राजस्थान सरकार |

15th February 2019   ·   0 Comments

लवामा में शहीद हुए राज्य के सैनिकों के परिजनों को सरकार की ओर से बड़ी घोषणा की है
जयपुर। पुलवामा में शहीद हुए राज्य के सैनिकों के परिजनों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता के रूप में 25-25 लाख रुपए दिए जाएंगे।

25 बिघा जमीन या हाउसिंग बोर्ड का मकान मुफ्त शिक्षा
शहिद के बच्चो को 1800 रु की छात्रवृती दी जायेगी राजस्थान के शहिदों को व उसके परिजन में किसी 1को नौकरी माता.पिता के नाम 3 लाख की एफडी
परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने शहिदो के परिजनो को मुफ्त यात्रा की भी घोषणा की

शुक्रवार शाम को सरकार के स्तर पर इस संबंध में फैसला किया गया है।
सैनिक कल्याण मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बताया कि पुलवामा में पाकिस्तान की कायराना करतूत में शहीद हुए सैनिकों में प्रदेश के सैनिक भी शामिल है, उन सभी शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को सरकार यह राशि आर्थिक सहायता के रूप में देगी। सीएम अशोक गहलोत ने मंत्रियों और विधायकों को शहीदों की अन्येष्टि में शामिल होने के निर्देश भी दिए है।
गौरतलब है कि गुरुवार की शाम को जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षा बलों के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 42 जवान शहीद हो गए। शहीद जवानों में राजस्थान के 5 जवान भी शामिल हैं। शहीद जवानों का नाम नारायण लाल गुर्जर (राजसमन्द), जीतराम गुर्जर (भरतपुर), हेमराज मीणा (कोटा), रोहिताश लाम्बा (जयपुर) और भागीरथ (धौलपुर) है। शहीद होने की खबर मिलते ही जवानों के घर में मातम पसर गया।

हर आंख नम, जुबां पर आग

पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए कोटा के सपूत हेमराज मीणा का गांव विनोदकलां शुक्रवार को शोक में डूबा रहा। हर आंख में आंसू और जुबां पर आक्रोश था। विनोदकलां गांव से करीब चार किमी दूर खेत पर बने घर में शहीद की वीरांगना मधुबाला दिनभर अचेत सी रही। शहीद के बुजुर्ग माता-पिता हरदयाल और रतना बाई की आंखों से भी गम बार-बार बहता रहा। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, लेकिन देर शाम तक पार्थिव देह नहीं पहुंच पाने से लौट गए। गांव में व हेमराज के घर पर दिनभर ग्रामीणों, परिचितों, प्रशासनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों की भीड़ लगी रही।

शोक में डूबा सुन्दरावली गांव

भरतपुर के नगर थाना क्षेत्र के गांव सुन्दरावली निवासी जवान जीतराम पुत्र राधेश्याम गुर्जर शहीद हो गए। जीतराम 92 बटालियन में कांस्टेबल के पद पर तैनात था। कांस्टेबल जीतराम की शहादत की खबर न तो बूढ़े माता-पिता को है और न ही पत्नी व दोनों बेटियों को। परिवार में चाचा व भाई ही हैं जो पूरे गम को सीने में दबाए पार्थिव देह के आने का इंतजार कर रहे हैं।

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